| एक समय था जब लोगो की आवष्यकताएॅ बहुत ही सीमित थी संचार एवं आवागमन की सुविधा भी सीमित थी तथा व्यापार एवं उधोग भी स्थानीय स्तर पर ही होते थे इसके कारण हर परिवार और गौत्र के लोग एक दुसरे के अति निकट थे अर्थात भोगोलिक दुरियां बिल्कुल नहीं थी पारस्परिक परिचय की तो कोई समस्या ही नही थी धीरे धीरे जैसे जैसे पारावारिक आवष्यकताएँ बढती गई संचार एवं आवागमन के साधन बढते गये वैसे वैसे लोग व्यापार उधोग की तलाष मे घर गांव छोड कर बाहर निकलते गये और पुरे देष मे अलग अलग जाकर सपरिवार बसते गये कालान्तर में पारिवारिक और सामाजिक दुरियां बढती गयी सम्पर्क के अभाव में आपसी व्यवहार सीमित होते गये और पारिवारिक परिचय सीमित होते गये कौन कहॉ है क्या करता है किसी को भी इसकी पूर्ण जानकारी नही रही सभी अपने अपने सिमित दायरे मे सिमट के रह गये |